बिहार की धरोहरों का गौरवशाली इतिहास, संरक्षण आवश्यक



रविशंकर उपाध्याय। बिहार जिस ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है, वह केवल प्रदेश की पहचान नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की समृद्धि के प्रमाण हैं। यहां के प्राचीन विश्वविद्यालयों के भग्नावशेष, मंदिर, स्मारक भवनों, हस्तशिल्प, संगीत और पारंपरिक कला पद्धतियां पुरातन काल से आधुनिक युग तक गौरवगाथा सुनाते आ रहे हैं। वर्तमान समय में, बिहार सरकार और कई सांस्कृतिक संस्थाएं राज्य की धरोहर को सुरक्षित रखने, प्रचारित करने और समृद्ध बनाने के लिए सतत प्रयासरत हैं। बिहार का प्राचीन गौरव नालंदा और विक्रमशिला जैसे शिक्षा केंद्रों, भगवान बुद्ध को ज्ञान प्रदान करने की भूमि पर स्थित महाबोधि मंदिर, वैशाली और राजगृह का शांति स्तूप, पावापुरी में जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर की निर्वाण भूमि पर स्थित जल मंदिर और सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज की जन्मस्थली पटना साहिब गुरुद्वारा जैसे धार्मिक स्थलों के रूप में विश्वभर में पहचाना जाता है। यह बेहद आवश्यक है कि विरासतों को लेकर प्रदेश में जन-जागरूकता की जाए।



महाबोधि मंदिर और नालंदा विवि के अवशेष यूनेस्को द्वारा हैं संरक्षित

महाबोधि मंदिर और नालंदा महाविहार दो यूनेस्को द्वारा संरक्षित विरासत स्थली हैं, जो भारतीय शिक्षा और धर्म के विश्व-स्तरीय केन्द्र रहे हैं। इन धरोहर स्थलों पर देश-विदेश के लाखों पर्यटक हर साल आते हैं, जिससे न केवल पर्यटन को बल मिलता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार भी सृजित होता है। यूनेस्को ने गया जिले में स्थित बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर कॉम्प्लेक्स को वर्ष 2002 में विश्व विरासत की सूची में लाया था। इस सूची में प्रदेश का दूसरा स्थल नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष हैं जिसे 2016 में सूचीबद्ध किया गया था। विश्व धरोहर की सूची में शामिल होने के लिए प्रदेश में अभी कई अति महत्वपूर्ण स्थल है, जो सम्पूर्ण विश्व में अपनी अलग पहचान रखती है। इनमें प्रमुख है नालंदा जिले के ही राजगीर में स्थित 'साइक्लोपियन वाल' और जहानाबाद जिले में स्थित बराबर एवं नागार्जुनी की गुफाएं।



बिहार पुरातत्व अधिनियम के तहत 48 आर्कियोलॉजिकल साइट्स हैं संरक्षित

बिहार प्राचीन स्मारक और पुरातत्व अधिनियम, 1976 के अंतर्गत 48 ऐतिहासिक स्थलों एवं स्मारकों को बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग द्वारा सुरक्षित घोषित किया गया है तथा भारत सरकार के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिनियम के तहत प्रदेश में 71 स्थलों को सुरक्षित किया गया है। बक्सर में राजा भोज के भवन के भग्नावशेष से लेकर मोतिहारी में जॉर्ज ऑरवेल के जन्म स्थान तक को बिहार पुरातत्व विभाग ने करीब 13 पुरातत्व स्थलों को पिछले पंद्रह वर्षों के अंदर अपने दायरे में लिया है। राज्य के पुरातत्व निदेशालय के शीर्ष अधिकारियों के मुताबिक, बिहार प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्व स्थल भग्नावशेष एवं कला निधि अधिनियम, 1976 के तहत संरक्षित स्मारकों की कुल संख्या 48 हो गई है। 

बिहार के पुरातत्व निदेशालय की तरफ से साझा किए गए आंकड़े के मुताबिक 236 वर्ष पुराना ऐतिहासिक गोलघर उन प्रथम छह स्मारकों में शामिल है जिसे 1976 में संरक्षित घोषित किया गया था। पांच अन्य ऐतिहासिक स्थल हैं। अगमकुआं और गुलजारबाग का कमलदह जैन मंदिर, बेगू हज्जाम की मस्जिद और पटना सिटी की छोटी पटन देवी और कंकड़बाग की दुरूखी प्रतिमा। वर्ष 2016 में बक्सर जिले के डुमरांव स्थित राजा भोज के भवन के भग्नावशेषों को पुरातत्व विभाग के दायरे में लाया गया जबकि मधुबनी के दवालखा गांव के हरेश्वर नाथ मंदिर को 2015 में इस सूची में शामिल किया गया।

बिहार की धरोहर जीवित प्रमाण है कि प्राचीनकाल से यह भूमि ज्ञान, कला, धर्म, उद्यम और नवोन्मेष की भूमि रही है। वर्तमान में सरकार, संस्थाएं, समाज और युवा वर्ग इसका संरक्षण-अन्वेषण निस्संदेह कर रहे हैं। आधुनिक प्रयासों, नवाचारों, योजनाओं और जनजागरूकता से यह स्पष्ट है कि बिहार की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक सम्पदा का भविष्य ओर भी सशक्त और उज्ज्वल है। धरोहर की सुरक्षा, विस्तार और आधुनिकता का समावेश प्रदेश को विकास की नई राह देगा, जिससे न सिर्फ बिहार, बल्कि पूरे देश को सशक्त बनाने में अहम भूमिका मिलेगी।

मुख्य ऐतिहासिक धरोहरों की दुर्दशा

हालांकि बिहार के धरोहर स्थलों की वर्तमान स्थिति चिंताजनक है, जहाँ कुछ ऐतिहासिक धरोहरें जर्जर अवस्था में हैं और उचित संरक्षण के अभाव में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही हैं। बिहार के ऐतिहासिक स्थलों जैसे चाणक्य गुफा, पटना सिटी, गिद्धौर किला (जमुई), मुंगेर का किला, रोहतासगढ़ और शेरगढ़ का किला, कई पुराने विरासत भवन (पटना तथा गयाजी) और बौद्ध, हिंदू, जैन तीर्थ स्थल संरक्षण की बाट जोह रहे हैं। बिहार के कई किले, जो कभी क्षेत्र की आन-बान-शान था, सरकारी उपेक्षा का शिकार होकर जमींदोज होने की कगार पर है। इसी तरह पटना की कई ऐतिहासिक इमारतें ध्वस्त होने या खस्ताहाल हो चुकी हैं। गया, मुंगेर, दरभंगा, और मुजफ्फरपुर जैसे शहरों में भी यही स्थिति है। सरकार द्वारासंरक्षण के पुख्ता प्रयास हुए भी नहीं हैं, इसके कारण जमीनी स्तर पर धरोहर स्थलों की वास्तविक स्थिति में ढेर सारी समस्याएं यथावत हैं: जैसे गंदगी, उचित संरक्षित रखरखाव, सुरक्षा प्रबंधन और जागरूकता का अभाव।

सरकारी उपेक्षा, कला संस्कृति को लेकर फंड की कमी, अप्रशिक्षित स्टाफ और संरक्षण के नाम पर केवल खोखली योजनाओं ने इस समस्या को बहुत गंभीर बना दिया है। कई ऐतिहासिक स्थलों को असंवेदनशील शहरी विकास के कारण ध्वस्त या क्षति पहुंच रही है। रूचि व जागरूकता की कमी आम नागरिकों में, जिसके चलते स्थानीय विरासत समुदाय का हिस्सा न बनकर उपेक्षित रह गई है। कई स्थल गंदगी, अवैध कब्जे और पर्यटकों के अनुचित व्यवहार के कारण भी क्षतिग्रस्त हो रहे हैं।

संरक्षण वास्तुकार, लेखक, और शोधकर्ता लगातार इसके प्रति चिंता जता रहे हैं कि धरोहरों की रक्षा के लिए सिर्फ सरकारी योजनाएं नहीं, नागरिकों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। एक समीक्षात्मक दृष्टिकोण से देखें तो 110 साल से ज्यादा की बिहार की यात्रा में जितना इतिहास और सांस्कृतिक सम्पदा संजोयी गई, उसे बचाए रखने की जिम्मेदारी सरकार, समाज और प्रशासन तीनों की बनती है। क्योंकि बिहार की ऐतिहासिक धरोहरें सिर्फ अतीत का गौरव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान की पूंजी हैं। यदि आज इनका ईमानदारी से संरक्षण और संवर्द्धन नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियां न सिर्फ अपने अतीत से कट जाएँगी, बल्कि विकास के मार्ग पर बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान भी ढक जाएगी।

ये आर्कियोलॉजिकल साइट्स है संरक्षित:

गोलघर पटना

अगमकुआं गुलजारबाग, पटना सिटी

बेगू हज्जाम की मस्जिद गुलजारबाग, पटना सिटी

जैन मंदिर, कमलदह गुलजारबाग, पटना सिटी

दो रूखी प्रतिमा कंकड़बाग, पटना

छोटी पटन देवी पटना सिटी

अलावल खां का मकबरा सासाराम

सूर्य मंदिर, कन्दाहा सहरसा

कटरा गढ़ मुजफ्फरपुर

नेपाली मंदिर हाजीपुर


खेरी पुरातत्व स्थल शाहकुंड, भागलपुर

महमूदशाह का मकबरा कहलगांव, भागलपुर

जलालगढ़ किला कसबा, पूर्णिया

आरा हाउस, महाराजा कॉलेज हाता आरा

चौसागढ़ नसरतपुर, बक्सर

दाउद खां का किला दाउदनगर, औरंगाबाद

रामशिला पर्वत गया

प्रेतशिला पर्वत चिरैयारोड, बहादुर बिगहा

विष्णुपद मंदिर गया

ब्रह्नयोनि पहाड़ गया


हजारीमल धर्मशाला बेतिया

मीरा बिगहा जहानाबाद

बाबू कुंवर सिंह जन्म स्थल भोजपुर

जामी मस्जिद वैशाली

मसही कैमूर कैमूर

मुंगेर किला मुंगेर

चिरांद पुरास्थल सारण

ताराडीह बोधगया

निशान सिंह स्मारक रोहतास

अपसढ़ गढ़ व वराह प्रतिमा नवादा

पार्वती पहाड़ नवादा

जार्ज ऑरवेल की जन्मस्थली मोतिहारी

टेकारी किला गया

अहिल्या स्थान दरभंगा

तेल्हाड़ा नालंदा

सोफा मंदिर बेतिया

मॉरिशन बिल्डिंग पटना

लॉर्ड मिंटो टावर जमुई

हरेश्वरनाथ मंदिर मधुबनी

राजा भोज का किला नवरतन गढ़, बक्सर

लारी अरवल

कोटेश्वर धाम गया

लाली पहाड़ी लखीसराय

सतसंडा पहाड़ लखीसराय

घोषीकुंडी पहाड़ लखीसराय

बिछवे पहाड़ लखीसराय

लय लखीसराय

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